अंधी बूढ़ी मां को पहचानने से इनकार कर दिया एक बेटे ने जी हां दोस्तों आज मैं आपको जो कहानी सुनाने जा रही हूं वह एक ऐसे बेटे की है जिसने अपनी अंधी बूढ़ी मां को पहचाने वह घर में रहने के लिए मना कर दिया इसीलिए दोस्तों यह कहानी पूरी सुनिए गा यह कहानी सुनीता नाम की एक महिला की है जिसका एक छोटा सा बेटा था जिसका नाम रवि था और रवि जब 1 साल का था तब सुनीता के पति का स्वर्गवास हो गया वह अपने बेटे को अकेले ही पाल रही थी

Motivational Stories In Hindi प्रेरक कहानियां motivational story in hindi Top 10 Best Motivational Story In Hindi | ये कहानियाँ आपको Motivate karengi

वह दूसरों के घरों में बर्तन झाड़ू पोछा लगाकर जो पैसे कमाती थी उन पैसों को अपने बेटे के ऊपर खर्च करती थी वह हमेशा इस सोच में रहती थी कि मैं अपने बेटे को स्कूल में एडमिशन कैसे करा पाऊंगी उसको एक बड़ा इंसान बना पाऊंगी या नहीं हमारा घर भी किराए का है वह दिन रात बहुत मेहनत करती थी वाह थक जाती तो अपने बेटे को याद  कर फिर से काम करना शुरू कर देती वह लोगों के कपड़े भी धोने लगी और अधिक पैसा जमा करने लगी एक दिन सुनीता ने अपनी मालकिन से कहा कि आपका बेटा जिस स्कूल में पढ़ता है उसी स्कूल में मेरे बेटे का भी एडमिशन करा दीजिए और जो भी फीस होगी वह आप मेरी तनख्वाह में से काट लीजिएगा मालकिन ने सुनीता के बेटे का एडमिशन स्कूल में करा दिया

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और अपने बेटे की पुरानी किताब भी उसको दे दी पढ़ने के लिए सुनीता का बेटा रवि भी अब स्कूल जाने लगा और स्कूल के बाद खूब अच्छे से मन लगाकर पढ़ाई करने लगा समय बीतता गया और रवि बड़ा हो गया और उसकी मां बूढ़ी हो गई रवि नौकरी करने शहर चला गया वहां जाकर उसने शादी कर लिया

वह अपनी मां को भूल कर अपनी पत्नी के साथ शहर में मजे से अपनी जिंदगी जीने लगा एक दिन रवि ऑफिस से घर आ रहा था तभी उसका कार एक्सीडेंट हो जाता है सबसे ज्यादा चोट उसके चेहरे पर आती है जिससे उसकी आंख की रोशनी चली जाती है और वह अंधा हो जाता है कई साल तक वह ऐसा ही रहता है एक दिन डॉक्टर का फोन आता है डॉक्टर कहता है किसी ने अपनी आंखें डोनेट करी है आ जाओ आज तुम्हारा ऑपरेशन कर दें ऑपरेशन के बाद रवि को सब कुछ दिखने लगता है

वह फिर से पहले वाली जिंदगी अपनी जीने लगता है फिर कुछ दिन बाद एक अंधी बूढ़ी महिला उसके घर आती है और कहती है बेटा मैं तुम्हारी मां हूं तुम्हारे साथ यहां शहर में रहने आई हूं रवि कहता है मेरी मां अंधी नहीं थी और उसको पहचानने से इंकार कर देता है और उसको अपने घर में भी नहीं बुलाता है अंधी बूढ़ी मां दुखी होकर अपने गांव वापस चली जाती है जब यह बात गांव के एक आदमी को पता चलती है तो वह तुरंत ही शहर रवि के पास जाता है और कहता है आज तुम जिस आंख से देख रहे हो वह तुम्हारी मां की है तुम्हारी मां ने ही अपनी आंखें तुमको दी थी और आज तुमने ही उनको पहचानने से इंकार कर दिया यह सब सुनकर रवि रोने लगा

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और तुरंत गांव पहुंच गया अपनी मां के पास और उनका पैर पकड़ कर रोने लगा और कहां मां अगर तुम मुझे चप्पल से भी मारेगी तो भी मैं आज के बाद तुम को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा तुम बस मेरे साथ ही रहोगे बस एक बार मुझे माफ कर दो उसकी मां की आंख में भी आंसू आ गए और उसने तुरंत रवि को गले से लगा लिया मां तो आखिर मां ही होती है एक अच्छे इंसान के साथ हमेशा अच्छा ही होता है दोस्तों कभी भी अपनी मां के साथ बुरा व्यवहार मत करना और हमेशा उनकी देखभाल करना और उनके साथ ही रहना दोस्तों आज अपनी मां के लिए लाइक और शेयर जरूर कर देना एक नई कहानी के साथ फिर मिलेंगे धन्यवाद

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