दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि हरी खाद क्या है और इसके लाभ क्या क्या है तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़िएगा पौधों को हरी अवस्था में ही भूमि में पलटकर सड़ा देने की क्रिया को हरी खाद देना कहते हैं। यह क्रिया भूमि की संरचना के सुधार, जीवांश की मात्रा बढ़ाने तथा पोषक तत्व देने के लिए की जाती है।

हरी खाद क्या है | Hari khad kya hai iske labh likhiye
हरी खाद क्या है | Hari khad kya hai iske labh likhiye

हरी खाद के प्रकार क्या है (Hari Khad ke Prakar)

हरी खाद प्रयोण हेतु फसलों के गुण

एक आदर्श हरी खाद की फसल में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है-

(1)  दलहनी फसलें जिनमें अधिक नत्रजन इकट्ठा करने की क्षमता हो, अर्थात्‌ उसकी जड़ों पर काफी संख्या में ग्रंथियां हों।

(2) फसल शीघ्र बढ़ने वाली हो ताकि जल्दी ही पलटी जा सके।

(3) फसल को उगाने हेतु जल मांग अधिक न हो |

(4) गहरी जड़ों वाली फसलें हों।

(5) अधिक पत्तियां हों तथा वानस्पतिक वृद्धि अच्छी हो जिससे अधिकाधिक जीवांश पदार्थ प्राप्त हो सके ।

6) शीघ्र सड़ाव हो सके |

हरी खाद देने का ढंग

हरी खाद के लिए मानसून से पूर्व पलेवा देकर अथवा मानसून प्रारम्भ होने पर फसल बोई जाती है| जिन खेतों में हरी खाद पलटने के बाद धान लेना हो वहां मई के प्रारम्भ में पलेवा देकर बोई जाय। ऊँची जमीन में सनई, ग्वार, लोबिया तथा निचली व ऊसर भूमि में ढैंचा की फसल से अधिक खाद मिलती है। फसल बोने से पूर्व यदि 30-40 कि0ग्र0 फास्फोरस प्रति हेक्टेयर दे दी जाय तो हरी खाद की मात्रा व गुण और अधिक बढ़ जाते हैं | विभिन्न फसलों की बीज दर प्रति हेक्टेयर निम्न प्रकार है-

फरल का नाम              बीज-दर ( प्रति हेक्टेयर)

 सनई                                           40-45

ढैंचा                     60-70

ग्वार                                           20-25

लोबिया                                      25-30

फसल छिटकवां विधि से बोई जा सकती है। जब फसल 30-40 दिन की हो जाय तो किसी मिट्टी पलटने वाले हल से पलट देना चाहिए । ध्यान रहे कि हर हालत में फसल में फूल आने से पूर्व तथा 45-20 अगस्त तक अवश्य पलट दी जाय | खेत में नमी कम होने पर सड़ाव पूरा नहीं होता है। यदि हरी खाद पलटने के बाद वर्षा नहीं हुई तो पानी लगा देना चाहिए | पलटने के बाद 20-25 दिन में हरी खाद सड़ जाती है, तत्पश्चात्‌ खेत की जुताई करके तैयार किया जा सकता है। हरी खाद पलटाई के तुरन्त बाद धान की रोपाई की जा सकती है। हरी खाद के उपयोग से न केवल धान की उपज में वृद्धि होती है बल्कि इसका मिट्टी के गुणों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

हरी खाद देने से फसलों को क्या-क्या लाभ होता है?

हरी खाद से निम्नलिखित लाभ होते हैं

(1) भूमि को जीवांश मिलता है जिससे लाभकारी जीवाणुओं की क्रियाशीलता बढ़ती है।

(2) भूमि की संरचना में सुधार होता है।

(3) भूमि में जल-शोषण व धारण शक्ति बढ़ती है जिससे भूमि कटाव रोकने में सहायता मिलती है।

(4) हरी खाद के लिए उगाई गई दलहनी फसलें भूमि में वायुमण्डल से नत्रजन इकट्ठा करती हैं।

(5) कुछ अनुपलब्ध तत्व जैसे फास्फोरस, कैल्शियम तथा लोहा आदि की उपलब्धता बढ़ जाती हैं।

(6) इसके अवशिष्ठ प्रभाव से आगामी फसल से लाभान्वित होती हैं।

FAQ – Hari Compost हरी खाद के बारे में आप क्या जानते हैं

Question 1 : हरी खाद क्या है?

Answer 1 :  पौधों को हरी अवस्था में ही भूमि में पलटकर सड़ा देने की क्रिया को हरी खाद कहते हैं।

Question 2 : हरी खाद के लिए सर्वोत्तम फसल है?

Answer 2 :  इसमें सनई, ढैंचा, लोबिया, ग्वार आदि फसलें उगाई जाती हैं।

Question 3 : हरी खाद पलटने के  कितने दिन बाद सड़ जाती हैं?

Answer 3 :  पलटने के बाद 20-25 दिन में हरी खाद सड़ जाती है, ।

Question 4 : कौन सी फसलें भूमि में वायुमण्डल से नत्रजन इकट्ठा करती हैं।?

Answer 4 :  हरी खाद के लिए उगाई गई दलहनी फसलें भूमि में वायुमण्डल से नत्रजन इकट्ठा करती हैं।

Question 5 : हरी खाद बनाने की विधि?

Answer 5 :  हरी खाद बनाने के लिए खेत में जो फसलें उगाई जाती हैं या फिर दूसरे स्थानों से हरी पत्तियां टहनियां आदि लाकर खेत में पलट कर या उनको दबाकर सड़ा दी जाती हैं इसी विधि को हरी खाद कहते हैं।

Question 6 : हरी खाद की परिभाषा?

Answer 6 :  पेड़ पौधों या फिर फसलों को हरी अवस्था मे जमीन मे पलट कर या फिर दबाकर सड़ा देने की क्रिया के अंतर्गत जो खाद तैयार होती है उसको हरी खाद कहते हैं।

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निष्कर्ष

हरी खाद एक बहुत अच्छी प्रकार की खाद है और इसको बनाने के लिए ज्यादा मेहनत की भी जरूरत नहीं पड़ती है इसको करने से आपकी फसलों को अत्यधिक लाभ भी मिलता है खाद को तैयार करने के लिए ज्यादा पैसे की भी जरूरत नहीं पड़ती है अन्य खाद में से हरी खाद को किसान लोग ज्यादा प्राथमिकता देते हैं आप भी इन खादों का प्रयोग कर सकते हैं यह लेख सिर्फ आपकी जानकारी के लिए है या लेख अगर आपको अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

डिस्क्लेमर (Disclaimer) : या लेख केवल आपकी जानकारी को बढ़ाने लिए आपके साथ शेयर किया गया है इनको करने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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