मैं अपने देवर और नंद को देखकर  रोने लगी हर रोज की तरह इस रात को भी मेरी ननंद और देवर पता नहीं कहां से रात को आते हैं और एक बड़ा सा डिब्बा लेकर दोनों अपने कमरे में जाकर पता नहीं क्या करते हैं मैंने लाख जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मुझे कभी नहीं बताया कि आखिर वह दोनों क्या कर रहे हैं 

मैं अपने देवर और नंद को देखकर रोने लगी | हिंदी कहानी | Hindi Kahaniya | Hindi Shorts Story

मैंने इस बारे में अपने पति रमेश से भी बात किया मैंने कहा कि मेरी नंद और देवर पता नहीं क्या कमरे में करते हैं और दिन-रात बस वही कमरे में घुसे रहते हैं कभी भी किसी काम को करने में मेरी मदद भी नहीं करते हैं दिन भर अपने में मस्त रहते हैं और मैं काम करती रहती हूं लेकिन उन्होंने मेरी बात सुनने से मना कर दिया और कहा आरती जाओ आज ऑफिस में बहुत काम है मुझे जाने दो फिर बात करेंगे फिर मैंने सोचा क्या किया जाए आखिर वह मेरी ननंद और देवर है और मैं उसकी भाभी हूं

अगर वह कुछ भी गलत करेंगे तो घर का ही नाम खराब होगा इसीलिए मैंने निश्चय किया यह सारी बात मैं अपनी सास को बताऊंगी मैं अपनी सास  के कमरे में गई और उन्हें सारी बात बताई कि कैसे मेरी नंद और देवर देर रात को कहीं से आते हैं बड़ा सा डिब्बा लेकर और उसमें पता नहीं क्या होता है फिर वह दोनों अपने कमरे में चले जाते हैं

अंदर से कमरा बंद कर लेते हैं और उसके बाद सुबह ही कमरा खोलते हैं मैंने खिड़की से भी झांकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने खिड़की को भी बंद कर दिया फिर उनकी सास ने दोनों को बुलाकर पूछा कि आरती जो कह रही है वह सब सच है तुम लोग आखिर क्या कर रहे हो तो उन लोगों ने कहा कि भाभी  झूठ बोल रही है हम लोग कमरे में सोने के लिए जाते हैं और कुछ नहीं करते हैं  लेकिन आरती को तो अपनी नंद और देवर दोनों पर बहुत गहरा शक था वह जानती थी कि यह लोग कुछ तो छुपा रहे हैं

एक दिन आरती ने सोचा आज तो मैं इन सब का पता लगाकर रहूंगी चाहे जो हो जाए फिर उसने अपने देवर और नंद के कमरे में जाकर पलंग के पीछे चादर ओढ़ के छुप गई और इंतजार करने लगी कब उसका देवर आएगा थोड़ी देर बाद उसका देवर हाथ में बॉक्स लेकर कमरे में आया और दरवाजा बंद कर लिया उसकी नंद तखत पर बैठी हुई थी उसकी नंद ने अपने भाई से कहा क्या हुआ सारा काम हो गया तो उसके भाई ने कहा हां सब काम हो गया तो उसने कहा ठीक है बॉक्स खोलकर दिखाओ उसने जैसे ही बॉक्स खोला उसकी भाभी आरती ने बॉक्स को देखकर जैसे बिल्कुल अचंभित हो गई  उसकी आंख में आंसू आने लगे वाह बहुत जोर जोर से रोने लगी यह सुनकर उसके देवर और नंद ने भाभी को देख लिया वह लोग भी परेशान हो गए हैं कि अब क्या होगा और उन्होंने अपनी भाभी से कहा यह बात आप घर में किसी से भी मत बताना हम लोग बड़ी मेहनत करके यहां तक पहुंचे हैं मैं अपनी बहन को आईएस बनाना चाहता हूं

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और उसके लिए पैसों की जरूरत होगी जिसके लिए मैं यहां बॉक्स में किताबें भर के दुकान दुकान पर जा कर बेचता हूं और जो भी पैसे आते हैं उससे अपनी बहन को कोचिंग करवाता हूं और रात भर उसको पढ़ाता हूं अगर यह बात अपने घर वालों को बता दिया तो घरवाले उसको पढ़ने नहीं देंगे और उसकी शादी करा देंगे भाभी यह सब सुनकर बहुत रोई क्योंकि वह उनके बारे में बहुत गलत गलत सोच रही थी फिर उनकी भाभी ने अपने देवर और नंद से कहा कि तुम लोगों को अब और मेहनत करने की जरूरत नहीं है अब तुमको जितने भी पैसे की जरूरत है वह मैं तुमको दूंगी

और उनकी भाभी ने अपने जेवर सोना चांदी बेचकर अपनी नंद को पढ़ाया और एक दिन उसकी नंद आईएएस बन जाती है और कहती है कि आज जो कुछ भी मैं हूं अपनी भाभी की वजह से हूं यह सब सुनकर उसकी सास और उसके पति को बहुत शर्म महसूस होती है इसीलिए दोस्तों कहा जाता है मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे आज उनका परिवार बहुत खुश है और सब मजे से अपनी जिंदगी जी रहे हैं दोस्तों या कहानी ( देवर नंद हिंदी कहानी ) से आपको क्या सीखने को मिला हमको जरूर बताना धन्यवाद

दोस्तों अपने मां बाप का ख्याल रखना कभी भी किसी के कहने पर या पैसों की लालच में अपने मां-बाप को मत छोड़ना दोस्तों यह कहानी आपको कैसी लगी हमको कमेंट करके जरूर बताना ( देवर नंद हिंदी कहानी )

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